‘यह तो लूट है’: कैंसर दवा पर 10 गुना महंगाई देख सुप्रीम कोर्ट भड़का, निजी अस्पतालों की मनमानी पर सवाल
नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं पर निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही भारी मुनाफाखोरी पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जब रिटेलर को महज 2,700 रुपये में मिलने वाली कैंसर दवा का एमआरपी 27,000 रुपये रखा जाता है, तो यह आम मरीजों और करदाताओं पर सीधा बोझ है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसे “कत्लेआम” और “दिनदहाड़े लूट” करार दिया। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, “यह 10 गुना मार्जिन क्यों? यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है?”
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों को अपनी इन-हाउस फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं।
- आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं के तहत इलाज होने पर अतिरिक्त खर्च अंततः करदाताओं को उठाना पड़ता है।
- दवा कंपनियों को नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों को इस भारी अंतर का फायदा हो रहा है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी दवाओं पर रिटेलर कीमत (PTR) से अधिकतम 16 प्रतिशत मार्जिन तय किया जाए, जैसा कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) में प्रावधान है। बेंच ने केंद्र से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
यह मामला एडवोकेट किशन चंद जैन और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें दवाओं, मेडिकल उपकरण और जेनेरिक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की गई है।
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