अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन योग फॉर हेल्दी एजिंग विषय पर योग, विज्ञान एवं आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), गाज़ियाबाद लोकल सेंटर द्वारा “Yoga for Healthy Ageing” विषय पर एक भव्य एवं ज्ञानवर्धक संगोष्ठी का आयोजन विवेकानंद हॉल, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, वसुंधरा, गाज़ियाबाद में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना तथा बढ़ती आयु में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अशोक कुमार गडिया, चेयरमैन, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, गाज़ियाबाद रहे। मुख्य वक्ता के रूप में परम पूज्य स्वामी सच्चिदानंद महेशानंद जी महाराज तथा संचार रत्न डॉ. एम. के. सेठ, आईटीएस, पूर्व सीजीएम, ALTTC, BSNL, गाज़ियाबाद उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) अलका अग्रवाल, निदेशक, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स, प्रो. (डॉ.) अमित जैन, डीन Academics, इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, गाज़ियाबाद तथा इंजीनियर आर. आर. तंवर, उत्तर क्षेत्र प्रमुख, दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित संदेश को बढ़ावा देने हेतु अतिथियों को पौध भेंट कर सम्मानित किया गया।
गाज़ियाबाद लोकल सेंटर के चेयरमैन एवं कार्यक्रम अध्यक्ष इंजीनियर पुनीत गोयल, ने मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत किया कार्यक्रम संयोजक इंजीनियर आर. के. गौर ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की महत्ता तथा समाज में योग के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक स्वरूप श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया।
अपने प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान में डॉ. एम. के. सेठ ने योग को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए मानव शरीर में स्थित सात प्रमुख ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मूलाधार चक्र स्थिरता, सुरक्षा एवं आत्मविश्वास का केंद्र है, स्वाधिष्ठान चक्र सृजनात्मकता एवं भावनात्मक संतुलन का स्रोत है, मणिपुर चक्र इच्छाशक्ति एवं आत्मबल को सशक्त बनाता है, अनाहत चक्र प्रेम, करुणा एवं मानवीय संवेदनाओं का केंद्र है, विशुद्धि चक्र संवाद एवं अभिव्यक्ति की शक्ति प्रदान करता है, आज्ञा चक्र अंतर्दृष्टि एवं विवेक को विकसित करता है तथा सहस्रार चक्र आध्यात्मिक चेतना एवं परम ज्ञान का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि योगाभ्यास, प्राणायाम एवं ध्यान के माध्यम से इन चक्रों को संतुलित कर व्यक्ति शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि Healthy Ageing का वास्तविक आधार केवल शरीर की देखभाल नहीं, बल्कि मन, प्राण एवं चेतना का संतुलित विकास है। अपने संबोधन में डॉ. सेठ ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान आध्यात्मिक ग्रंथ विज्ञान भैरव तंत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें वर्णित 112 ध्यान विधियाँ मनुष्य को आत्म-जागरूकता, मानसिक एकाग्रता एवं आंतरिक शांति की ओर ले जाती हैं। उन्होंने श्वास पर सजगता, वर्तमान क्षण में पूर्ण उपस्थिति, मौन साधना एवं ध्यान की विभिन्न विधियों को तनाव, चिंता एवं मानसिक अशांति से मुक्ति का प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक न्यूरोसाइंस एवं मनोविज्ञान आज उन सिद्धांतों की पुष्टि कर रहे हैं जिन्हें भारतीय ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व योग एवं ध्यान के माध्यम से प्रतिपादित किया था।
परम पूज्य स्वामी सच्चिदानंद महेशानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में योग को जीवन जीने की सर्वोत्तम कला बताते हुए कहा कि नियमित योग, ध्यान एवं सात्विक जीवनशैली से व्यक्ति न केवल निरोगी रहता है, बल्कि आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त करता है। उन्होंने आंतरिक शुद्धि, आत्मानुशासन एवं ईश्वर-साक्षात्कार की दिशा में योग की महत्ता पर विशेष बल दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथियों एवं वक्ताओं को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कॉर्पोरेट एवं नॉन-कॉर्पोरेट सदस्य, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ एवं युवा अभियंता उपस्थित रहे तथा सभी ने योग एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अंत में इंजीनियर आर. के. गौर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल समापन योग, स्वास्थ्य, आध्यात्मिक जागरूकता एवं मानव कल्याण के संदेश के साथ हुआ।
